दक्षिण भारतीय आगम पूजा

प्राचीन तमिल मंदिर परंपरा से जुड़ें

3,000 वर्षों से भी पुरानी आगम-शास्त्र की परंपरा — जहाँ पूजा की हर विधि, हर मंत्र, हर अर्पण निश्चित और पवित्र है।

माँ वाराही पूजा देखें

आगम शास्त्र क्या है?

वेद और आगम — हिंदू धर्म के दो स्तंभ। आगम मंदिर-विज्ञान है।

64 आगम ग्रंथ

शैव, वैष्णव और शाक्त परंपरा में 64 आगम ग्रंथ हैं जो मंदिर निर्माण, पूजा विधि, मूर्ति स्थापना और उत्सव सब नियंत्रित करते हैं।

सटीक विधि-विधान

आगम पूजा में हर विधि की सटीक परिभाषा है। अभिषेकम का समय, दीपम की संख्या, अर्चना के मंत्र — सब निश्चित।

प्रशिक्षित अर्चक

दक्षिण भारतीय मंदिरों में अर्चक (पुजारी) को बचपन से आगम-शास्त्र में प्रशिक्षित किया जाता है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी की विद्या है।

Villupuram Temple
सक्रिय मंदिर

विल्लुपुरम, तमिलनाडु

माँ वाराही अम्मन — सप्त माता शक्ति की 7वीं और सबसे रहस्यमय देवी। विल्लुपुरम मंदिर में आगम विधि से माँ वाराही की दिन में 4 बार पूजा होती है। यह मंदिर उन भक्तों के लिए जाना जाता है जो कठिन से कठिन संकटों से मुक्ति चाहते हैं।

प्रतिदिन 4 बार आगम विधि से पूजा

प्रशिक्षित तमिल अर्चक परिवार

आपके नाम और गोत्र से संकल्प

WhatsApp पर पूजा का वीडियो

आगम पूजा उत्तर भारतीय पूजा से अलग क्यों है?

उत्तर भारतीय पूजा

  • वेद-मंत्र आधारित
  • संस्कृत परंपरा
  • लचीली विधि
  • घर-मंदिर दोनों में

दक्षिण भारतीय आगम पूजादिव्यार्थ पर उपलब्ध

  • आगम-शास्त्र आधारित — 64 आगम
  • तमिल-संस्कृत द्विभाषी मंत्र
  • अत्यंत सटीक और नियम-बद्ध
  • केवल मंदिर में — अर्चक द्वारा
  • दीपम, अभिषेकम, अर्चना

हमारी प्रमुख आगम सेवा

Maa Varahi
दक्षिण भारत की एकमात्र सेवासक्रिय

माँ वाराही सर्व बाधा नाशक

माँ वाराही अम्मन — वराह रूपधारी, सप्त शक्ति की 7वीं माता। जो बाधा किसी देवता ने नहीं हटाई, वह माँ वाराही हटाती हैं। विल्लुपुरम के प्राचीन मंदिर में आगम विधि से संपन्न — आपके नाम से संकल्प, दीपम, अभिषेकम और अर्चना।

मंदिर

विल्लुपुरम

परंपरा

तमिल आगम

मूल्य

₹501 से

माँ वाराही पूजा के बारे में जानें

3,000 वर्ष पुरानी परंपरा — आज आपके लिए

तमिलनाडु जाए बिना — आगम परंपरा में माँ वाराही की पूजा का लाभ पाएं

800+ वाराही पूजाएं संपन्न