नवरात्रि की नौ देवियाँ — नवदुर्गा का स्वरूप और महत्व
त्योहार

नवरात्रि की नौ देवियाँ — नवदुर्गा का स्वरूप और महत्व

2025-05-25 · 11 मिनट पाठ

नवरात्रि के नौ दिन नौ अलग-अलग देवी रूपों की आराधना होती है। जानें शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — हर देवी का स्वरूप, मंत्र और प्रसाद।

नवदुर्गा — नौ रूप, एक शक्ति

हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना का सर्वोच्च उत्सव है नवरात्रि। नौ दिन, नौ रातें, नौ देवी। यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं — यह एक साधना है जिसमें साधक अपनी चेतना को शक्ति के नौ स्तरों से होते हुए परम चेतना तक ले जाता है।

नवदुर्गा में शामिल हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री।

प्रथम दिन — शैलपुत्री

पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ (बैल) है। दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल। ये मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।

मंत्र: "या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।" प्रसाद: गाय का घी और देसी गुड़।

द्वितीय व तृतीय दिन — ब्रह्मचारिणी व चंद्रघंटा

ब्रह्मचारिणी तप और साधना की देवी हैं। श्वेत वस्त्र, रुद्राक्ष माला, कमंडल और जप माला। ये स्वाधिष्ठान चक्र की शक्ति हैं। तृतीय दिन चंद्रघंटा की पूजा होती है — जिनके माथे पर अर्धचंद्र है और जो शौर्य और वीरता की प्रतीक हैं।

ब्रह्मचारिणी प्रसाद: चीनी और मिश्री। चंद्रघंटा प्रसाद: दूध और दूध से बनी मिठाई।

चतुर्थ से षष्ठ दिन

कूष्मांडा (चतुर्थ): ब्रह्माण्ड की रचयित्री। आठ भुजाएं, सूर्य के समान तेज। मालपुए का प्रसाद। स्कंदमाता (पंचम): कार्तिकेय की माता, सफेद कमल आसन। केले का प्रसाद।

कात्यायनी (षष्ठ): महर्षि कात्यायन की पुत्री, महिषासुरमर्दिनी। शहद का प्रसाद। ये विवाह के लिए विशेष फलदायी मानी जाती हैं — अविवाहित कन्याएं इनकी विशेष आराधना करती हैं।

सप्तम से नवम दिन — कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री

कालरात्रि (सप्तम): काली रात्रि की देवी। काला वर्ण, अग्नि-नेत्र, वज्र और कंटीला अस्त्र। ये भय-नाशिनी हैं। गुड़ का प्रसाद। महागौरी (अष्टम): श्वेत वर्ण, परम शांत, नारियल का प्रसाद।

सिद्धिदात्री (नवम): समस्त सिद्धियों की दात्री — अणिमा, महिमा, गरिमा आदि अष्ट सिद्धियां। तिल का प्रसाद। नवमी को हवन और कन्या-पूजन के साथ नवरात्रि संपन्न होती है।