आषाढ़ी एकादशी
त्योहारआषाढ़ी एकादशी
Jul 6, 2025

आषाढ़ी एकादशी

महत्व

आषाढ़ी एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी भी कहते हैं, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान) तक सोते रहते हैं।

वारकरी संप्रदाय के लिए यह सबसे पवित्र दिन है। पंढरपुर की वारी — लाखों भक्तों की पैदल यात्रा — इसी दिन अपने चरम पर पहुँचती है। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और संत नामदेव की परंपरा इस दिन जीवंत हो उठती है।

इस दिन व्रत करने से 1,000 अश्वमेध यज्ञ और 100 राजसूय यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। सत्यनारायण पूजा इस दिन की जाती है क्योंकि भगवान विष्णु के शयन से पहले उनकी विशेष आराधना की परंपरा है।

परंपराएं और अनुष्ठान

1

एकादशी व्रत

पूरे दिन अन्न त्याग, फलाहार, भगवान विष्णु का ध्यान और तुलसी पत्र अर्पण।

2

विष्णु सहस्रनाम

भगवान विष्णु के 1,000 नामों का पाठ — इस दिन विशेष रूप से प्रभावी।

3

तुलसी पूजन

तुलसी माता की विशेष पूजा — विष्णु की प्रिया, उनकी शयन से पहले।

4

सत्यनारायण कथा

देवशयनी से पहले भगवान की प्रसन्नता के लिए कथा और प्रसाद।

इस पर्व पर अनुशंसित पूजा

सत्यनारायण पूजा

सत्यनारायण पूजा

आषाढ़ी एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष कथा और पूजा।

पौराणिक कथा

एक बार महाराज मान्धाता ने ऋषि पुलस्त्य से पूछा कि एकादशी का इतना महत्व क्यों है। ऋषि ने बताया: जब भगवान विष्णु ने देखा कि पृथ्वी पर पाप बढ़ रहे हैं, तो उन्होंने एक देवी को उत्पन्न किया जो एकादशी थी। उन्होंने कहा — जो मेरे योगनिद्रा के आरंभ और समाप्ति के दिन उपवास करेगा, उसके सभी पाप नष्ट होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ी एकादशी का व्रत कैसे रखें?
दशमी (एक दिन पहले) की रात से ही सात्विक भोजन करें। एकादशी के दिन अन्न बिल्कुल न खाएं — फल, दूध, मेवा खा सकते हैं। भगवान विष्णु की पूजा करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और रात्रि जागरण करें।
क्या इस दिन ऑनलाइन पूजा बुक कर सकते हैं?
हाँ। दिव्यार्थ पर आप आषाढ़ी एकादशी के लिए 7 दिन पहले तक पूजा बुक कर सकते हैं। हमारे पंडित उसी दिन पूजा करेंगे और video तथा प्रसाद आपको भेजेंगे।
आषाढ़ी से देवोत्थान तक क्या नहीं करना चाहिए?
इस चातुर्मास काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते। यह समय साधना, भजन और ध्यान का है। भगवान विष्णु के जागने (देवोत्थान एकादशी) के बाद ही ये कार्य शुरू होते हैं।

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आपके नाम और गोत्र से विधिवत पूजा — video प्रमाण और प्रसाद घर पर।