
महत्व
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है — भगवान गणेश का जन्मदिन। यह महाराष्ट्र का सबसे बड़ा पर्व है और अब पूरे भारत में 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है।
भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं — सभी बाधाओं को दूर करने वाले। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन अनिवार्य है। नए व्यापार, नई शुरुआत, विवाह, गृह प्रवेश — सब में पहले गणपति की पूजा होती है।
इस दिन सत्यनारायण पूजा, गणेश स्थापना और मोदक अर्पण की विशेष परंपरा है। पीताम्बर वस्त्र, दूर्वा और लाल पुष्प गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं।
परंपराएं और अनुष्ठान
गणेश स्थापना
मिट्टी की गणेश मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा — 1.5, 5 या 10 दिनों तक पूजन।
मोदक भोग
मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग — घर के बने या मिठाई के मोदक।
दूर्वा अर्पण
21 दूर्वा की माला — गणेश जी को अत्यंत प्रिय, विशेष आशीर्वाद के लिए।
विसर्जन
गणेश जी को जल में विसर्जित करना — अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण।
इस पर्व पर अनुशंसित पूजा

पौराणिक कथा
माँ पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसमें प्राण फूँके — यह गणेश थे। जब शिव घर वापस आए तो गणेश ने उन्हें रोका। शिव क्रोधित हुए और उन्होंने गणेश का मस्तक काट दिया। पार्वती का विलाप सुनकर शिव ने एक हाथी का मस्तक लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया और उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य बनाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चतुर्थी पर सत्यनारायण पूजा क्यों होती है?
गणेश विसर्जन कब होता है?
क्या इस दिन पूजा ऑनलाइन बुक होती है?
गणेश चतुर्थी पर पूजा बुक करें
आपके नाम और गोत्र से विधिवत पूजा — video प्रमाण और प्रसाद घर पर।