
महत्व
नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। यह नाग देवता की उपासना का सबसे पवित्र दिन है। इस दिन सर्प को दूध पिलाने, मिट्टी की सर्प मूर्तियों की पूजा करने और अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल जैसे नागों को याद करने की परंपरा है।
जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष है — यानी जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं — उनके लिए नाग पंचमी पर त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष पूजा करना सर्वाधिक फलदायी होता है।
नाग देवता सर्प स्वरूप में भगवान शिव के गले में विराजते हैं। उनकी पूजा से पितृ दोष में भी राहत मिलती है क्योंकि पूर्वजों के साथ सर्प देवता का गहरा संबंध है।
परंपराएं और अनुष्ठान
नाग दूध अर्पण
नाग देवता को कच्चे दूध से अभिषेक — नाग पंचमी की प्रमुख परंपरा।
काल सर्प दोष पूजा
त्र्यंबकेश्वर में नाग पंचमी पर विधिवत काल सर्प शांति — सर्वोत्तम मुहूर्त।
नाग स्तोत्र पाठ
नाग देवताओं के 8 नामों का पाठ — सर्प भय और नाग दोष निवारण।
इस पर्व पर अनुशंसित पूजा

काल सर्प दोष पूजा
नाग पंचमी पर त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष निवारण — सर्वोत्तम मुहूर्त।
पौराणिक कथा
जब अर्जुन के पुत्र परीक्षित पर तक्षक नाग ने आक्रमण करने की बात हुई, तो उनके पुत्र जनमेजय ने सर्प यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी नागों को नष्ट करने का संकल्प था। आस्तीक मुनि ने इस यज्ञ को रुकवाया और नागों को बचाया — इसी दिन था नाग पंचमी। उसी दिन से नाग देवता की पूजा और उनके प्रति कृतज्ञता की परंपरा चली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
काल सर्प दोष के लिए नाग पंचमी क्यों सबसे अच्छी है?
क्या मैं नाग पंचमी पर ऑनलाइन पूजा बुक कर सकता हूँ?
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