
महत्व
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। यह माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की उपासना के नौ दिन हैं।
वर्ष में दो मुख्य नवरात्रि होती हैं — चैत्र (वसंत) और शारदीय (शरद ऋतु)। शारदीय नवरात्रि सबसे बड़ी होती है। दसवाँ दिन विजयदशमी (दशहरा) है — असत्य पर सत्य की विजय।
तंत्र साधकों के लिए नवरात्रि का विशेष महत्व है — बगलामुखी, काली, चामुंडा और अन्य महाविद्याओं की उपासना इन नौ दिनों में अत्यधिक फलदायी होती है।
परंपराएं और अनुष्ठान
घट स्थापना
कलश में देवी का आह्वान — नवरात्रि के प्रथम दिन अनिवार्य।
अखंड दीप
9 दिनों तक बिना बुझे जलता दीपक — देवी की उपस्थिति का प्रतीक।
बगलामुखी हवन
नवरात्रि में बगलामुखी हवन — शत्रु नाश, संपूर्ण कवच और विजय के लिए।
कन्या पूजन
अष्टमी और नवमी पर 9 कन्याओं की पूजा — देवी के 9 रूपों का साक्षात दर्शन।
इस पर्व पर अनुशंसित पूजा

बगलामुखी हवन
नवरात्रि में माँ बगलामुखी का 51,000 लाल मिर्च हवन — संपूर्ण शक्ति कवच।
पौराणिक कथा
जब महिषासुर के अत्याचार से देवता त्राहि-त्राहि कर रहे थे, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्तियों को मिलाकर आदिशक्ति महादुर्गा को प्रकट किया। देवी ने नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। इसीलिए नवरात्रि के नौ दिन और दसवें दिन विजयदशमी मनाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि व्रत में क्या खाएं?
बगलामुखी पूजा नवरात्रि में क्यों श्रेष्ठ है?
क्या मैं घर से ऑनलाइन नवरात्रि पूजा करा सकता हूँ?
शारदीय नवरात्रि पर पूजा बुक करें
आपके नाम और गोत्र से विधिवत पूजा — video प्रमाण और प्रसाद घर पर।