
महत्व
श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। पुराणों में वर्णन है कि इसी महीने समुद्र मंथन हुआ था और शिव ने हलाहल विष पान किया था — इस कृत्य से पूरे ब्रह्मांड की रक्षा हुई।
श्रावण के प्रत्येक सोमवार को रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और बिल्वपत्र अर्पण करने से शिव की विशेष कृपा मिलती है। इस माह में किया गया कोई भी शिव पूजन 108 गुना अधिक फलदायी माना जाता है।
कांवड़ यात्रा भी इसी महीने होती है — भक्त गंगाजल लेकर अपने प्रिय शिव मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं। हरिद्वार से लेकर काशी तक — पूरा उत्तर भारत शिवमय हो जाता है।
परंपराएं और अनुष्ठान
रुद्राभिषेक
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक — श्रावण में सर्वाधिक फलदायी।
बिल्वपत्र अर्पण
तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र — त्रिदेव का प्रतीक, शिव को अत्यंत प्रिय।
सोमवार व्रत
श्रावण सोमवार का व्रत — विवाह, स्वास्थ्य और मनोकामना के लिए विशेष।
महामृत्युंजय जाप
108 बार महामृत्युंजय मंत्र — श्रावण में शिव की उपस्थिति में अत्यंत शक्तिशाली।
इस पर्व पर अनुशंसित पूजा

महामृत्युंजय जाप
श्रावण में त्र्यंबकेश्वर में महामृत्युंजय जाप — 108 गुना अधिक प्रभावी।
पौराणिक कथा
जब समुद्र मंथन में कालकूट विष निकला, सभी देवता भयभीत हो गए। विष की ज्वाला से तीनों लोक जलने लगे। तब भगवान शिव आगे आए और उन्होंने सारा विष पी लिया। पार्वती ने उनका गला थाम लिया ताकि विष नीचे न उतरे — इस कारण शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। श्रावण माह में जल चढ़ाने की परंपरा इसी कृत्य के प्रति कृतज्ञता का भाव है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण में कौन सा पूजा सबसे ज़रूरी है?
श्रावण सोमवार का व्रत कैसे रखें?
क्या ऑनलाइन रुद्राभिषेक होता है?
श्रावण सोमवार पर पूजा बुक करें
आपके नाम और गोत्र से विधिवत पूजा — video प्रमाण और प्रसाद घर पर।