सुंदरकांड वाल्मीकि रामायण का वह अध्याय है जिसमें हनुमान जी की अद्भुत शक्ति, भक्ति और बुद्धि का वर्णन है। जानें पाठ की सही विधि और फल।
सुंदरकांड का परिचय
वाल्मीकि रामायण के सात कांडों में पांचवां कांड है सुंदरकांड। "सुंदर" शब्द लंका के उस क्षेत्र का नाम है जहां हनुमान जी माता सीता की खोज में गए थे। यह कांड हनुमान की शक्ति, बुद्धि, भक्ति और निर्भयता का महाकाव्यिक चित्रण है।
सुंदरकांड में 68 सर्ग (अध्याय) और लगभग 2900 श्लोक हैं। इसे रामायण का "हृदय" माना जाता है।
सुंदरकांड पाठ के लाभ
घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार। बुरी नजर, नकारात्मक शक्तियों और भय का नाश। संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए। शत्रुओं से मुक्ति और न्यायिक विवादों में सफलता।
हनुमान जी जहां जाते हैं वहां भगवान राम का वास होता है। इसलिए सुंदरकांड का पाठ घर में राम की उपस्थिति को आमंत्रित करता है।
पाठ विधि
मंगलवार या शनिवार को पाठ करना विशेष फलदायी है। प्रातः स्नान करके लाल या पीले वस्त्र पहनें। हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और चमेली का तेल अर्पित करें।
पाठ आरंभ करने से पूर्व श्री गणेश और भगवान राम का स्मरण करें। पाठ के दौरान बीच में नहीं उठें। पाठ समाप्ति पर हनुमान चालीसा पढ़ें और प्रसाद में बूंदी या लड्डू अर्पित करें।
