त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग — माहात्म्य और दर्शन विधि
तीर्थ

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग — माहात्म्य और दर्शन विधि

2025-04-28 · 8 मिनट पाठ

नासिक के पास स्थित त्र्यंबकेश्वर एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों की एक साथ पूजा होती है। जानें पूरा इतिहास और दर्शन व्यवस्था।

त्र्यंबकेश्वर का परिचय

महाराष्ट्र के नासिक जिले से 28 किमी दूर, ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है त्र्यंबकेश्वर। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी विशेषता यह है कि यहां लिंग में तीन मुख हैं — ब्रह्मा, विष्णु और महेश के।

गोदावरी नदी का उद्गम भी त्र्यंबकेश्वर से ही होता है। इसीलिए यह स्थान गंगा के समकक्ष पवित्र माना जाता है।

विशेष पूजाएं और उनका महत्व

त्र्यंबकेश्वर तीन विशेष पूजाओं के लिए प्रसिद्ध है: नारायण नागबलि (पितृ दोष और नाग दोष निवारण), नागबलि (पूर्वजन्म के कर्म का शोधन), और काल सर्प दोष पूजा।

इनके अलावा कुंडली में ग्रह-दोष निवारण, त्रिपिंडी श्राद्ध और विधिवत रुद्राभिषेक भी यहां विशेष फलदायी माने जाते हैं।

दर्शन और व्यवस्था

मंदिर प्रातः 5:30 बजे खुलता है। सुबह की आरती 6 बजे होती है। दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक मंदिर बंद रहता है। शाम की आरती 7:30 बजे और रात्रि दर्शन 8:30 बजे तक।

विशेष पूजाओं के लिए मंदिर ट्रस्ट से पहले बुकिंग करानी होती है। पूजा का समय और लागत पूजा के प्रकार पर निर्भर करती है।